रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक नए मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ एक तरफ शांति समझौते और युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठकें और चर्चाएँ हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच, एक बड़ी खबर सामने आई है कि रूस ने यूक्रेनी नौसेना के सबसे बड़े जहाज 'सिम्फेरोपोल' पर हमला कर उसे डुबो दिया है। इस घटना से दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष और भी गहरा होता दिखाई दे रहा है।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए बताया कि 'सिम्फेरोपोल' नामक यह मध्यम आकार का युद्धपोत डेन्यूब नदी के डेल्टा क्षेत्र में समुद्री ड्रोन द्वारा हमले का शिकार हुआ। यह जहाज रेडियो, इलेक्ट्रॉनिक, रडार और ऑप्टिकल निगरानी जैसे कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया था और इसे यूक्रेनी नौसेना में एक प्रमुख रणनीतिक उपकरण माना जा रहा था। मंत्रालय के अनुसार, यह अब पूरी तरह डूब चुका है।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने इस हमले को एक ऐतिहासिक घटना बताया है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी यूक्रेनी जहाज को समुद्री ड्रोन से निशाना बनाया गया है। यूक्रेनी अधिकारियों ने भी इस हमले की पुष्टि की है और जानकारी दी है कि जहाज पर हमला होने से एक नाविक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं। यूक्रेनी नौसेना ने बताया कि बचाव कार्य अब भी जारी है और अधिकतर चालक दल को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन कुछ सदस्य अभी भी लापता हैं।
यह जहाज 2019 में लॉन्च किया गया था और 2021 में यूक्रेनी नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। इसे 2014 में रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद यूक्रेन द्वारा निर्मित सबसे बड़ा जहाज माना जा रहा था। इसकी सामरिक उपयोगिता और निगरानी क्षमताओं के कारण इसे यूक्रेन की नौसैनिक क्षमता का प्रतीक माना जाता था।
इन घटनाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, शांति वार्ताओं के प्रयासों के बावजूद जमीनी हालात यह दिखाते हैं कि युद्धविराम और समझौते अभी दूर की कौड़ी बने हुए हैं। जब तक सैन्य संघर्ष बंद नहीं होता और दोनों पक्षों में विश्वास बहाली नहीं होती, तब तक किसी भी प्रकार की शांति स्थापना की उम्मीदें कमजोर बनी रहेंगी।
रूस द्वारा यूक्रेन के प्रमुख नौसैनिक जहाज को नष्ट करना न केवल सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि युद्ध अब जल, थल और वायु – तीनों क्षेत्रों में पूरी तरह फैल चुका है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध केवल वार्ताओं से नहीं रुकेगा, जब तक की दोनों पक्ष ईमानदारी से समाधान की दिशा में कदम नहीं बढ़ाते।